हे भारत -गिरीन्द्र मोहन झा

Girindra Mohan Jha

हे भारत !

रामायण की मर्यादा, नीति, कर्त्तव्यपरायणता तुममें,

है तुझमें वेद, उपनिषद, भगवद गीता का असीम ज्ञान,

विदुरनीति, नीतिशतक, कौटिल्य की नीति-अर्थशास्त्र तुममें,

कई महापुरुष हैं तेरे सपूत, है तू असंख्य रत्नों की खान,

सीवी रमण, मेघनाद साहा, होमी भाभा, है कलाम का विज्ञान,

दर्शन, अध्यात्म, साहित्य, स्वर्णिम इतिहास का यत्र-तत्र होता बखान।

हे भारत ! 

तुझे सदा प्रगति-पथ पर निरंतर होना है प्रवाहमान,

विश्व के शीर्ष पर स्थापित करना है नूतन कीर्तिमान।

हे भारत !

है तू अत्यंत दिव्य, निर्मल, श्रेष्ठ, सुन्दर और महान, 

तेरे सभी नागरिक हों सभ्य, शिक्षित और उदयमान,

सभी क्षेत्रों में तू शीर्ष शिखर पर सदा पहुंचता रहे,

है तुझे शत-शत वन्दन, है तुझे शत-शत प्रणाम।

……गिरीन्द्र मोहन झा

0 Likes
Spread the love

Leave a Reply