हे भारत !
रामायण की मर्यादा, नीति, कर्त्तव्यपरायणता तुममें,
है तुझमें वेद, उपनिषद, भगवद गीता का असीम ज्ञान,
विदुरनीति, नीतिशतक, कौटिल्य की नीति-अर्थशास्त्र तुममें,
कई महापुरुष हैं तेरे सपूत, है तू असंख्य रत्नों की खान,
सीवी रमण, मेघनाद साहा, होमी भाभा, है कलाम का विज्ञान,
दर्शन, अध्यात्म, साहित्य, स्वर्णिम इतिहास का यत्र-तत्र होता बखान।
हे भारत !
तुझे सदा प्रगति-पथ पर निरंतर होना है प्रवाहमान,
विश्व के शीर्ष पर स्थापित करना है नूतन कीर्तिमान।
हे भारत !
है तू अत्यंत दिव्य, निर्मल, श्रेष्ठ, सुन्दर और महान,
तेरे सभी नागरिक हों सभ्य, शिक्षित और उदयमान,
सभी क्षेत्रों में तू शीर्ष शिखर पर सदा पहुंचता रहे,
है तुझे शत-शत वन्दन, है तुझे शत-शत प्रणाम।
……गिरीन्द्र मोहन झा
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