जितनी पवित्र मेरी गीता है ,उतना ही पाक तेरा कुरान है
तो क्या हुआ अगर मैं हिंदू हु और तू मुसलमान है।।
ईद की सेवईयां मुझे भी बहुत पसंद है और
नवरात्र के मेले में घूमना तेरा भी अरमान है
तो क्या हुआ अगर मैं हिंदू हु और तू मुसलमान है।।
खेतों की हरियाली मुझे भी भाती है
तिरंगे का केसरिया तेरी भी शान है
तो क्या हुआ अगर मैं हिंदू हु और तू मुसलमान है।।
उर्दू की तहज़ीब मुझे भी बहुत खूबसूरत लगती है
हिंदी तुम्हारी भी ज़ुबान है
तो क्या हुआ अगर मैं हिंदू हु और तू मुसलमान है।।
हमें लाल और हरे में बांटने वाले सुनो
लहू एक सा बहता सबकी रगो में ,सबकी क्या एक सामान है
फिर क्या हुआ अगर कोई हिंदू है और कोई मुसलमान है।।
HEAD TEACHER – SHIVAM KUMAR JHA
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