प्रभाती पुष्प -जैनेंद्र प्रसाद

Jainendra

प्रभाती पुष्प

सफाई काध्यान
रूप घनाक्षरी छंद


पूजा बाद फल फूल
नदियों में बहाकर,
प्रदूषण बढ़ाने में, करते हैं योगदान।

पवित्र जलाशयों में
त्याग कर मल-मूत्र,
अपवित्र जल में ही, करते हैं हम स्नान।

शुभ अवसर पर
डुबकी लगाने जाते,
सफाई के मामले में, लोग नहीं देते ध्यान।

पवित्र सरोवर व
धार्मिक तीर्थ स्थलों में,
गंदगी फैलाना नहीं, धर्म क्या है अपमान?

जैनेन्द्र

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