प्रभाती पुष्प
सफाई काध्यान
रूप घनाक्षरी छंद
पूजा बाद फल फूल
नदियों में बहाकर,
प्रदूषण बढ़ाने में, करते हैं योगदान।
पवित्र जलाशयों में
त्याग कर मल-मूत्र,
अपवित्र जल में ही, करते हैं हम स्नान।
शुभ अवसर पर
डुबकी लगाने जाते,
सफाई के मामले में, लोग नहीं देते ध्यान।
पवित्र सरोवर व
धार्मिक तीर्थ स्थलों में,
गंदगी फैलाना नहीं, धर्म क्या है अपमान?
जैनेन्द्र
0 Likes
