मुझे मत मारो न पापा..अवनीश कुमार


मुझ प्यारी बिटिया के लिए लोरी बनाओ न पापा।
धीमे सुरों में मुझे सुलाओ न पापा,
अपनी बाहों में भरकर झूला झुलाओ न पापा।
गुनगुन गुनगुन गुनगुनाओ न पापा ।
गुनगुन गुनगुन गुनगुनाओ न पापा ।

प्यार भरी किस्से सुनाओ न पापा,
मेरे सपनों में रंग भर जाओ न पापा।
राजकुमारियों की कहानियों में
मेरे हिस्से का राजकुमार भी लाओ न पापा।
अपने मीठे-मीठे बोल मुझे भी सुनाओ न पापा
गुनगुन गुनगुन गुनगुनाओ न पापा।
गुनगुन गुनगुन गुनगुनाओ न पापा।

डाँट से नहीं, प्यार से मुझे भी समझाओ न पापा।
मैं रूठूँ तो मुझे जल्दी से मना लो न पापा,
दुनिया से पहले मेरा साथ निभाओ न पापा।
जरा प्यार से बिटिया को रानी बिटिया  बुलाओ न पापा,
गुनगुन गुनगुन गुनगुनाओ न पापा।
गुनगुन गुनगुन गुनगुनाओ न पापा।

मुझे भी  प्यार-भरा कई नाम दो न पापा।
मुझ पर जरा इतराओ न पापा,
मेरी छोटी-छोटी शरारतों पर
बंद होठों से ही मुस्काओ न पापा
गुनगुन गुनगुन गुनगुनाओ न पापा।
गुनगुन गुनगुन गुनगुनाओ न पापा।

मेरे सपनों के भी पंख हैं।
इन्हें मत काटो न पापा।
मेरे आँसू भी मोतियों जैसे हैं,
इन्हें यूँ अनदेखा मत जाने दो न पापा।
बस एक बार…
बस एक बार…
लाडली बिटिया कहो न पापा,
दिल के सिंहासन पर बिठाओ न पापा।
अपने घर की बगिया का फूल बनाओ न पापा,
मेरे होने से आँगन महकाओ न पापा
गुनगुन गुनगुन गुनगुनाओ न पापा।

पापा…
पा…पा…
पापा…
मुझे मत मारो न पापा,
मेरे सपनों को मत मारो न पापा।
मेरी साँसों को चलने दो न पापा,
मेरी धड़कनों को धड़कने दो न पापा
मुझे जीने दो न पापा
मुझे दुनिया को देखने दो न पापा
मुझे भी गुनगुन गुनगुन गुनगुनाने दो न पापा।
मुझे भी गुनगुन गुनगुन गुनगुनाने दो न पापा।

लेखन व स्वर :-
अवनीश कुमार
बिहार शिक्षा सेवा (शोध व अध्यापन उपसंवर्ग)

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