💐रुद्राणी संग त्रिलोचन ने💐
(1)
तिलक चंदन लगे मस्तक,
जटाधारी सदा राजे।
विराजीं शीश पर गंगा,
सुधाकर माथ पर साजे।
कलेवर है अघोरी-सा,
न गौरी छोड़ कर भागी।
जगत सारे रहे सोते,
महारुद्र पा निशा जागी।
(2)
गरल पी कर त्रिलोचन ने,
भरी है प्राण हर आत्मा।
सुधा की धार पीकर,
नमन है आज परमात्मा।
रहे खुशहाल यह जीवन,
यही है कामना स्वामी।
करें मुझपर कृपा पावन,
बनाएँ आप अनुगामी।
(3)
यही पावन महीना है,
उपासक शिव कृपा पाते।
बुलाते हैं उन्हें बाबा,
समर्पण गीत जो गाते।
बजे घंटा शिवालय में,
चढ़ाया हार फूलों का।
रुद्राणी संग त्रिलोचन ने,
लिए आनंद झूलों का।
एस.के.पूनम ः
सेवानिवृत्त शिक्षक
फुलवारी शरीफ, पटना
0 Likes
