वन उपवन के प्राणी प्यारे, जीवन के ये शुभ सितारे। धरती का ये संतुलन बनाएँ, प्रकृति की नित शोभा बढ़ाएँ।[...]
प्रेम की पराकाष्ठा- अवनीश कुमारप्रेम की पराकाष्ठा- अवनीश कुमार
एक आहट जैसे प्रिय के पाँवों की हल्की चाप, एक सुखद अहसास ऐसे जैसे स्नेह रस से सींचती माँ, एक[...]
बिहार की गौरव गाथा – सुरेश कुमार गौरवबिहार की गौरव गाथा – सुरेश कुमार गौरव
जननी थी यह ज्ञान की, वैदिक युग का मान था, गौतम की तपभूमि बन, बुद्ध का संज्ञान था। विष्णु का[...]
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: विधा- दोहावली- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: विधा- दोहावली- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’
दिवस राष्ट्र विज्ञान का, लाया नव उल्लास। रमण खोज की याद कर, उर में भरें उजास।। चिंतन कर विज्ञान का,[...]
ऊँ नमः शिवाय – रत्ना प्रियाऊँ नमः शिवाय – रत्ना प्रिया
पतित पावनी गंगा को शिव, सिर पर धारण करते हैं। नमः शिवाय जपने वाले का, कष्ट निवारण करते हैं।। मृत-संजीवनी[...]
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस- रामकिशोर पाठकराष्ट्रीय विज्ञान दिवस- रामकिशोर पाठक
हम करें विज्ञान की बातें, देश के उत्थान की बातें। विज्ञान और नवाचार में, युवाओं को सशक्त बनाना। राष्ट्रीय विज्ञान[...]
जरा जरा-सी बात पर – अमरनाथ त्रिवेदीजरा जरा-सी बात पर – अमरनाथ त्रिवेदी
जरा जरा-सी बात पर, दिल को कभी न रूठाइए। जरा जरा-सी बात पर, मन को कभी न दुखाइए। निज घर की गुप्त बातों को, बाहर कभी न फैलाइए।[...]
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद: युगपुरुष की गाथा- सुरेश कुमार गौरवडॉ. राजेन्द्र प्रसाद: युगपुरुष की गाथा- सुरेश कुमार गौरव
३ दिसंबर १८८४, बिहार की माटी में जन्म हुआ। ज्ञान, सत्य, सेवा का दीप, नवयुग का प्रकाश दीप्त हुआ। बाल्यकाल[...]
शीर्षक: निरख सुहानी भोर- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’ विधा- मनहरण घनाक्षरीशीर्षक: निरख सुहानी भोर- देव कांत मिश्र ‘दिव्य’ विधा- मनहरण घनाक्षरी
निरख सुहानी भोर, सुखद विहंग शोर, प्राणवायु का सहर्ष, अनुभव कीजिए। ललित प्राची की लाली, भृंगी बाग मतवाली, भीनी गंध[...]
प्रकृति का संदेश- सुरेश कुमार गौरवप्रकृति का संदेश- सुरेश कुमार गौरव
हरी-भरी यह धरती अपनी, इसको हमें बचाना है। पेड़ लगाकर, जल बचाकर, हरियाली फैलाना है॥ नदियाँ बहें सदा निर्मल-सी, कलुष[...]
