पूनम की रात शीतल चाँदनी फैलाए अंतिम रात्रि आश्विन शरद पूर्णिमा कहलाए घर में माताएँ क्षीर खीर बनाए। पूनम[...]
शरद पूर्णिमा – रूचिकाशरद पूर्णिमा – रूचिका
शरद पूर्णिमा का सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता चाँद। दूधिया रोशनी बिखेरता प्रेम चाँदनी संग दिलोंजान से करता। घटता[...]
मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
दिन भर काम करे, कभी न आराम करे, अकेली सुबह शाम, भोजन बनाती हो। हमें विद्यालय भेज, कपड़े बर्तन धोती,[...]
दोहावली- रामकिशोर पाठकदोहावली- रामकिशोर पाठक
अपने मन की कीजिए, रखकर मन में चाव। औरों की वो मानिए, जो हो सही सुझाव।। सत्य वचन हीं[...]
सत्प्रवृत्ति के सोपान – अमरनाथ त्रिवेदीसत्प्रवृत्ति के सोपान – अमरनाथ त्रिवेदी
कर्त्तव्य हमारे ऐसे हों नित , जहाँ मन की मलिनता न छाए। सदुपयोग, अधिकार का ऐसे करें , जहाँ अहंकार[...]
देखो सानवी आई है – रामकिशोर पाठकदेखो सानवी आई है – रामकिशोर पाठक
देखो सानवी आयी है। संग सहेलियाँ लायी है।। रंग दो माँ पाँव सभी का, लगे मनोहर भाव सभी का,[...]
चिड़िया रानी – रूचिकाचिड़िया रानी – रूचिका
चूँ चूँ करती चिड़िया आती दाना-पानी कहाँ से लाती। क्या खाती और क्या वह पीती, बोलो बोलो कैसे वह जीती।।[...]
मम्मी दुनिया से निराली है – अमरनाथ त्रिवेदीमम्मी दुनिया से निराली है – अमरनाथ त्रिवेदी
दुनिया चाहे कुछ भी कह ले मम्मी ही हमारी जान है। हर सुख-दुःख में साथ वह देती , मम्मी ही [...]
मेरे राम- स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’मेरे राम- स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’
राम जप है, राम तप है, राम आदि अंत है। राम राग, राम त्याग, राम तो अनंत है। राम[...]
देवी माँ- कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’देवी माँ- कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’
देवी माँ के असली रूप को भला कौन है जान पाया, जैसा जिसका भाव माँ ने उसको वैसा रूप[...]
