स्वर्ग नरक कहीं और नहीं है इसी पृथ्वी पर सब, बैठके थोड़ा सोचिए जब समय मिलता है तब। इसी पृथ्वी[...]
भारत के प्राचीन ग्रंथ- गिरीन्द्र मोहन झाभारत के प्राचीन ग्रंथ- गिरीन्द्र मोहन झा
वेद-वेदान्त की है उक्ति यही, सदा बनो निर्भीक, कहो सोsहं , उपनिषद कहते हैं, ‘तत्त्वमसि’, तुम में ही है ‘ब्रह्म’,[...]
सागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झासागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झा
सागर ने नदी से कहा- सरिते! लोग कहते हैं, तुम नदी समान बनो, चलो, निरंतर चलो, विघ्नों को लाँघकर, अनवरत[...]
हरियाली विकसाएँ हम- रत्ना प्रियाहरियाली विकसाएँ हम- रत्ना प्रिया
सूरज के प्रचण्ड ताप से , अब नहीं कुम्हलाएँ हम । आओ करें श्रृंगार धरा का, हरियाली विकसाएँ हम ॥[...]
योग दिवस मनाये-कंचन सिंहयोग दिवस मनाये-कंचन सिंह
#मैं-हूं-योगदूत #Iam yogdoot आओ बच्चों योग करें हम, मिलजुल कर यह प्रयोग करें हम, योग है एक ऐसा सोपान, जिसको[...]
मृत्यु -गिरीन्द्र मोहन झामृत्यु -गिरीन्द्र मोहन झा
मृत्यु अटल है, शरीर की, मरण असम्भव, जमीर की, मृत्यु यदि मिले सुमृत्यु तो, देश हित, लोक हित में हो,[...]
है बेबस धरती – एस.के.पूनमहै बेबस धरती – एस.के.पूनम
मनहरण घनाक्षरी बहती है कलकल, सोचती है हरपल, सूखे नहीं नीर कभी,यही दुआ करती। तट पर आशियाना, साधु-संतों का ठिकाना,[...]
वन गमन – कुमकुम कुमारी “काव्याकृतिवन गमन – कुमकुम कुमारी “काव्याकृति
वन गमन (तंत्री छंद) जनक दुलारी, हे सुकुमारी, कैसे तुम,वन को जाओगी। पंथ कटीले,अहि जहरीले, कैसे तुम,रैन बिताओगी।। सुन प्रिय[...]
किसने रोका है? – गिरीन्द्र मोहन झाकिसने रोका है? – गिरीन्द्र मोहन झा
किसने रोका है? अंधेरा घोर घना है, एक बत्ती जलाने से किसने रोका है? प्रदूषण बहुत ही है, एक पेड़[...]
तुझे अपनाना है- एस.के.पूनमतुझे अपनाना है- एस.के.पूनम
गगन में मेघ छाए, ठंडी-ठंडी बूंदें लाए, अंबु से सरिता भरी,हरि को पिलाना है। चल पड़े आप साथ, थाम रखें[...]
