शिक्षक – कहमुकरी सबके हित को तत्पर रहता। अपने हक में कभी न कहता।। दोष गिनाते बने समीक्षक। क्या सखि? साजन! न सखी! शिक्षक।।०१ भूली बिसरी याद दिलाए। रोज नया…
राष्ट्र भक्त हम, कहलाएँ- वासुदेव छंद गीत राम किशोर पाठक
राष्ट्र भक्त हम, कहलाएँ- वासुदेव छंद गीत राष्ट्र हेतु हम, मिट जाएँ। राष्ट्र-भक्त हम, कहलाएँ।। आओ मिलकर, पले यहाँ। कदम मिलाकर, चले जहाँ।। गीत संग हम, यह गाएँ। राष्ट्र-भक्त हम,…
ॐ कृष्णय नमः एस के पूनम
🙏ऊँ कृष्णाय नमः🙏 विधाता छंद। (विलोचन में दिखी लाली) चुनावों ने विचारों का, दिये थे खोल जब ताले। ललक ने हस्त फैलाया, अधर पर थे कई प्याले। प्रचारों से जगी…
वाह रे इंसान -जैनेन्द्र प्रसाद रवि
वाह रे इंसान पितरों को पानी देते हैं, जिंदा को सम्मान नहीं, गली-गली इंसान भटकता, क्या उसमें भगवान नहीं? मूर्ति की पूजा होती है, फूल चढ़ाए जाते हैं, कुछ जाति…
शिव बम भोले -राम किशोर पाठक
शिव बम भोले- भुजंग शिशुसुता छंद वार्णिक शिव-शिव बम भोले हैं। मधु रस मन घोले हैं।। जब-जब हम बोले हैं। सुनकर शिव डोले हैं।।०१।। पशुपति त्रिपुरारी हैं। समरस शुभकारी हैं।।…
पायल से मन -राम किशोर पाठक
पायल से मन, डोल रहा- वासुदेव छंद गीत मन ही मन कुछ, बोल रहा। पायल से मन, डोल रहा।। करती छन-छन, हर-पल है। होती तन-मन, हलचल है।। कानों में रस,…
बिरसा मुंडा की जयंती-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
आजादी आधार, मिली जब से भारत को। दौड़ पड़े सबलोग,विनत हुए सु-स्वागत को।। सुनकर विस्मित मान,रहे हैं खुद को प्राणी। कितने तन बलिदान,हुए हैं जग कल्याणी।। श्रेष्ठों में से एक,आज…
फिर क्यों करती है माँ हल्ला-राम किशोर पाठक
कहती अम्मा मुझको लल्ला। फिर क्यों करती है माँ हल्ला।। कान्हा थें कितना ही नटखट। माखन मिसरी खाते चटपट।। घूमा करते सदा निठल्ला।। फिर क्यों करती है माँ हल्ला।।०१।। फिर…
रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
बोल अरे क ख या ग घ,घोल मिठापन डाल रही है। बैठ गई जब सम्मुख माॅं तब,बालक ज्ञान प्रक्षाल रही है।। जीवन में सुविचार प्रवेशित,बालक में अब ढाल रही है।…
विजयोत्सव दिवस -नीतू रानी
विषय -विजयोत्सव दिवस। शीर्षक -अंग्रेजों से लड़ते रहे। बाबू वीर कुंवर सिंह वीर कुंवर सिंह का असली नाम बाबू वीर कुंवर सिंह था, पिता का नाम बाबू शाहबजादा माता का…