कर्मवीर-डॉ स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’कर्मवीर-डॉ स्नेहलता द्विवेदी ‘आर्या’

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कर्मवीर जीवन कब शोक मनाता है, कर्मवीर भी मारा जाता है। उठकर प्यारे अब धीर धरो, संघर्ष से क्यों घबराता[...]

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स्वच्छता-शुकदेव पाठकस्वच्छता-शुकदेव पाठक

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स्वच्छता आदर्श जीवन वह होता मानव जिसमें व्यवस्थित रहता। जीवन सही आदतों का मेल वरना, हम जीवन में फेल। बच्चों,[...]

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विपरीतार्थक शब्द-सुधीर कुमारविपरीतार्थक शब्द-सुधीर कुमार

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विपरीतार्थक शब्द आओ बच्चों तुम्हें सिखाता, हूं मैं आज कुछ उल्टा शब्द। विपरीतार्थक को विलोम भी कहते  उल्टे अर्थ देते[...]

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Sanyukta

माँ का ममत्व-संयुक्ता कुमारीमाँ का ममत्व-संयुक्ता कुमारी

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माँ का ममत्व माँ के ममत्व को त्याग और विश्वास को गोदी वाले गागर को अनंत नेह के सागर को[...]

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जिंदगी का सार-संगीता कुमारी सिंहजिंदगी का सार-संगीता कुमारी सिंह

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जिंदगी का सार यूं ही कभी आसमाँ को निहारते, देखा मैंने, शाम के धुंधलके में, चाँद का निकलना, शुभ्र, धवल,[...]

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कैद हो गई जिन्दगी-प्रीति कुमारीकैद हो गई जिन्दगी-प्रीति कुमारी

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कैद हो गई जिन्दगी  कैद हो गई जिन्दगी, यूँ ही समय व्यतीत हो रहा, ऐसा लगता है मानो, दुर्गम है[...]

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तन माटी का एक खिलौना-रानी सिंहतन माटी का एक खिलौना-रानी सिंह

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तन माटी का एक खिलौना जन्म-मरण का फेरा यारों चलता बारंबार यहाँ तन माटी का एक खिलौना टूटा कितनी बार[...]

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