दिवाली आई- गीतिका कूड़ा-करकट करो सफाई। है नजदीक दिवाली आई।। कार्तिक लेकर शुभता आता। सदियों से यह रीत निभाई ।। साफ करें हम गली-मुहल्ला। दीवारों की कर रंगाई।। परिजन सबकी…
चलो हाथ धोते हैं अवधेश कुमार
चलो हाथ धोते हैं । एक दिन हाथ बोले । चलो आज नया काम करते हैं, गंदगी से दोस्ती तोड़ते हैं, साबुन-पानी संग हाथ धोते हैं। उंगलियाँ हँसकर बोलीं ,…
गजल एक प्रयास- राम किशोर पाठक
गजल एक प्रयास चलो अब आज हम सीखें कहा कैसे गजल यारों। जिसे उर्दू गजल कहता वही हिंदी सजल यारों।। कहा कोई अजल इसको बिना सिर पैर सा देखो। मगर…
दीपावली का त्योहार – आशीष अम्बर
दीपावली का त्योहार आया, संग में अपने खुशियाँ लाया । रंगोली से घर को सजायेंगे, मिलकर खुशियाँ खूब मनायेंगे । दीपों की भी सजी कतार, जगमग कर रहा अपना घर…
गीदड़ तब शोर मचाएगा – रामपाल प्रसाद सिंह
गीदड़ तब शोर मचाएगा… निज शेर पाॅंव पीछे खींचे। निज ऑंखों को करके नीचे।। तब बुरा समझ कहलाएगा गीदड़ तब शोर मचाएगा मौसम छाया कई दिनों से। चल रहे हैं…
हे हरि क्लेश हरो -रामपाल प्रसाद सिंह
हे हरि! क्लेश हरो। विधा गीत। मेरे पीछे पड़ा जगत है,कर दो मालिक मदद जरा। सूख रहे जीवन उपवन को,हे हरि!कर दो हरा-भरा।। देना है तो दे दो मुझको,हमको तुम…
अक्टूबर – रुचिका
देखो,कैसे आ गया अक्टूबर थोड़ी सी ठंडी हवा लेकर, थोड़ी सी सूरज की गर्मी चुराकर थोड़ी सी सूरज में नर्मी लाकर जैसे करने को आतुर है शीत का स्वागत देखो…
हां मैं शिक्षक हूं।
जीवन के अंधियारे को, नित्य निज प्रकाश से भारती हूं। तुम कहते हो मैं ठहरी हूँ, पर मैं निर्झर बनकर बहती हूँ । हां मैं शिक्षक हूं। यदि मैं कर्म…
मन:स्थिति
मन:स्थिति मन चंचल है द्रुतगामी है, अकल्पनीय है इसकी स्थिति, कभी व्यथित कभी विचलित, अबूझ है इसकी स्थिति, कभी आत्मकेंद्रित, कभी पराश्रित, अबोधगम्य है इसकी स्थिति, कभी किंकर्तव्यविमूढ, कभी स्वावलंबी,…
मतदान -रामकिशोर पाठक
मतदान – मनहरण घनाक्षरी दौड़ भाग कर रहे, खोज-खोज मिल रहे, पाँव भी पकड़ रहे, आया मतदान है। देखकर निहारते, हृदय से पुकारते, गले में बाह डालते, जैसे पहचान है।…