माता से विनय – राम किशोर पाठक

माता से विनय- चौपाई छंद सुन लो माता विनय हमारी।तेरी महिमा न्यारी – न्यारी।।दुष्टों का संहार किया है ।भक्तों का उद्धार किया है ।।०१।। माँ आई है मेरी बारी ।माँ…

सफल होना – राम किशोर पाठक

बासंती छंद वार्णिक आओ मेरे पास, सफल जो चाहो होना।भूलो सारी बात, अगर चाहोगे सोना।।हारे वैसे लोग, सतत आगे जो भागे।जीते हैं वें लोग, अगर पीछे भी जागे।। पाना हो…

विज्ञान टीएलम बनाते बच्चे – अवधेश कुमार

खिलखिलाती आँखों में चमक नए विचारों की,गुरुजी जगाते चिंगारी सृजन-संसारों की।कागज़, रंग और विज्ञान के छोटे-छोटे खजाने,बना जाते हैं ऐसे टीएलएम जैसे बच्चों के नजराने । जहाँ किताबें देतीं राहें,…

नाइट शिफ्ट की संवेदना – अवधेश कुमार

कभी आओ जो फुर्सत में,तो कुछ बातें कर लें,जो ठहर गई है ज़िंदगी,उसका भी हिसाब कर लें। शाम से सुबह तक जागती हैं ये आँखें,इंतज़ार की सलवटों में डूबी,कितने सवालों…

मन अगर वैधव्यमय हो.. डॉ स्वराक्षी स्वरा

मन अगर वैधव्यमय होतन सजाकर क्या करूंगी? चाह कब मैंने किया थास्वर्ण से यह तन सजानाऔर तो इच्छा नहीं थीआसमां तक उड़के जानाकामना इतनी सी मेरीसाथ मिलकर पग बढ़ाना पांव…

बेटी अभिशाप नहीं वरदान है – पूजा कुमारी

जाने क्यों लोग बेटी को बोझ समझते हैं। बेटी कोई अभिशाप नहीं यह तो आंगन की लक्ष्मी है।। किसी के घर खुशहाली बनकर तो किसी के घर लक्ष्मी बनकर आती…

नमन तुम्हें है विधाता – राम किशोर पाठक

श्याम समवर्णिक छंद नमन तुम्हें है विधाता।सबल हमें जो बनाता।।अगर तुम्हें रास आता।सहज बने सर्व ज्ञाता।। हम-सब अज्ञान पाले।मगन सभी ज्ञान वाले।।तुम करुणा दान दे दो।अजय बने मान दे दो।।…

विज्ञान शिक्षकों का प्रशिक्षण – अवधेश कुमार

विज्ञान शिक्षकों का प्रशिक्षण एक कल का दिन था, बीत गया कहानी बनकर,आज नई सुबह है, आई सुनहरी किरणें बुनकर।एक उम्मीद का सूरज, IRISE बनकर आया,ज्ञान का दीप जलाकर, राहें…