श्यामला सांवरिया एक दिन श्यामा प्यारी, साथ में सहेली सारी, पानी भरने को गई, गोकुल नगरिया। पहले तो घबराई, फिर[...]
ॐ कृष्णय नमः -एस के पूनमॐ कृष्णय नमः -एस के पूनम
ॐ कृष्णाय नमः विधा:-मनहरण स्वयं भूखे रह कर, पूत का भरतीं पेट, शयन में सोचती हूँ,कहाँ से अन्न लाऊँ। श्रम[...]
सुरभित हो संसार -रामकिशोर पाठकसुरभित हो संसार -रामकिशोर पाठक
सुरभित हो संसार – दोहा छंद चित विकार से मुक्त हो, निर्मल रहे विचार। पावन मन निज राखिए, सुरभित हो[...]
मुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठकमुझको कान्हा आज बनाओ -राम किशोर पाठक
अम्मा कुछ मुझको बतलाओ। मुझको कान्हा आज बनाओ। जो चाहूँ वह दे दो मुझको। ऐसे कभी नहीं तड़पाओ।। मैं भी[...]
ग्रामीण परिवेश-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’ग्रामीण परिवेश-जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
सुबह सवेरे जाग, कबूतर और काग, धूप सेकने को बैठी, पक्षियांँ मुंडेर पर। फसलें खेतों से जब किसानों के घर[...]
भरकर आस है -रामकिशोर पाठकभरकर आस है -रामकिशोर पाठक
भरकर आस है – मनहरण घनाक्षरी लाल मुख प्राची किए, मोह रही जैसे प्रिय, भाव को जगाती हिय, भरकर आस[...]
मन उड़ान जब भरे हृदय से -रामकिशोर पाठकमन उड़ान जब भरे हृदय से -रामकिशोर पाठक
मन उड़ान जब भरे हृदय से – गीत (१६-१४) तन सुवास भी उड़े गगन में, मन में सुंदर आस जगे।[...]
आप ही खास हैं -रामकिशोर पाठकआप ही खास हैं -रामकिशोर पाठक
आप ही, खास हैं- अरूण छंद गीत २१२-२१२-२१२-२१२ हो सके, तो कभी, पास में आइए। आप ही, खास हैं, मान[...]
पुकारिए उसे सदा रामकिशोर पाठकपुकारिए उसे सदा रामकिशोर पाठक
पुकारिए उसे सदा – पंचचामर/नराच/नागराज छंद गीत १२१-२१२-१२१-२१२-१२१-२ लखे कभी विकार तो, सवाल जो तजा करे। पुकारिए उसे सदा, विचार[...]
बच्चो को सिखाइए-जैनेन्द्र प्रसाद सिंहबच्चो को सिखाइए-जैनेन्द्र प्रसाद सिंह
बच्चों को सीखाइए जल हरण घनाक्षरी छंद खलिहान छत पर- जहांँ भी जगह मिले, बागवानी करने को, बच्चों को भी[...]
