मैडम जी! मैडम जी! कब खुलेगा हमारा प्यारा यह स्कूल ?
हम बच्चों के बिना आप विद्यालय आतीं हैं , ये है कहां का रूल।।
बच्चों! भीषण शीतलहर के कारण, सरकार का बना यह रूल।
हाड़ कंपाती ठंड में निकलने का ना करना भूल।।
मैडम जी हम सबको अब तो घर में नहीं लगता है मन।
आपके निकट दौड़ी चली आई, चाहे चले हवा सन सन।।
हमको लगती आप हैं प्यारी,देंती शिक्षा ज्ञान।
साथ रहें हम मिलजुलकर और बड़ों का करें सम्मान।।
नहीं डांटती हम सबको, करतीं हैं बस प्यार।
गतिविधियों और खेल खेल में देतीं शिक्षा सार।।
रोज कहानी हमें सुनाती, देती नैतिक ज्ञान।
पढ़ लिखकर होशियार बनें हम, बढ़ाएं देश का मान।।
जी करता है अभी ले आऊं,काॅपी कलम किताब।
हिंदी के संग अंग्रेजी पढ़ें और मजे से सीखें हिसाब।।
अच्छा बच्चों पहले तुम सब रक्खो अपना ध्यान।
पहले स्वास्थ्य मायने रखता फिर है शिक्षा ज्ञान।।
स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी विशिष्ट शिक्षिका
प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी, राघोपुर,सुपौल
