पद्यपंकज sandeshparak,Shakshanik घर की कलियाँ- राम किशोर पाठक

घर की कलियाँ- राम किशोर पाठक


Ram Kishore Pathak

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घर के उपवन की कलियों को।
नेह लुटाती उन डलियों को।।

ठीक नही ऐसे बिसराना।
करके खाली चित गलियों को।।

रही सुबह को जो मुस्काती।
मनभावन शोख तितलियों को।।

मर जाती है धीरे-धीरे।
समझों कुछ देख मछलियों को।

खुलकर उनको उड़ने देना।
दम भर नाजुक पिण्डलियों को।।

बचपन उनसे छीन न लेना।
डाल अँगूठी उंगलियों में।।

पढ़ा लिखा काबिल कर देना।
निकलेगी तान मुरलियों में।।

रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978

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