मुहब्बत है- रामकिशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

मुहब्बत है – गजल
१२२२-१२२२-१२२२-१२२२

हमें तो हिंद से यारो अधिक इतनी मुहब्बत है।
लुटाकर जान भी अपनी इसे करना हिफाजत है।।

करे हर-पल वफा जिससे हमारा वह वतन भारत।
उठाकर आँख जो देखे यहाँ किसकी हिमाकत है।।

उठाते लोग अक्सर है यहाँ पर ऊँगली यारो।
नहीं कायर समझ लेना सहन करना शराफत है।।

तिरंगा शान से नभ में हमेशा गान गाता है।
जमी पर श्रेष्ठ सदियों से वतन बस एक भारत है।।

पयोनिधि पग सदा धोता हिमालय ताज मस्तक पर।
छटा है स्वर्ग से बढ़कर प्रकृति की यह नजाकत है।।

जिसे सींचा करे गंगा हरे जो पाप दुनिया की।
हमें है गर्व भारत पर मिला ऐसा विरासत है।।

अहिंसा पाठ दुनिया को पढ़ाने बुद्ध थे आएँ।
यही पर राम जैसे भी कई जन्में तथागत है।।

सुर सुरीला मिल गया तो यह गजल भावन हुआ।
कर दिया जीवंत इसको यह तराना हो गया।।

रचनाकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978

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