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छायावाद के शिखर कवि
जयशंकर प्रसाद
जयंती विशेष कविता
भावों की सरिता बनकर,
शब्दों में प्राण बसाए।
छायावाद के शिखर कवि,
प्रसाद हुए कहलाए।
आँसू, कामायनी, झरना,
काव्य-जगत की अमर धरोहर।
जहाँ नारी की गरिमा बोली,
जहाँ मानवता हुई उजागर।
संघर्ष, करुणा, स्वप्न और दर्शन,
सबको तुमने एक किया,
छाया में भी दीप जलाकर
मानव मन को उजास दिया।
इतिहास के पन्नों में भी,
तुमने चेतना भर दी थी।
नाटक, काव्य और कथा में,
भारतीय आत्मा गढ़ दी थी।
आज जयंती पर नमन तुम्हें,
हे काशी के महाकवि महान।
जब तक हिंदी जीवित है,
तब तक अमर रहेगा नाम।
स्वरचित एवं मौलिक
मनु कुमारी,विशिष्ट शिक्षिका, प्राथमिक विद्यालय दीपनगर बिचारी, राघोपुर, सुपौल

