पद्यपंकज Uncategorized जल जीवन -रुचिका

जल जीवन -रुचिका



जल जीवन

जल जो धरा की नमी को बचाये,
उर्वरता बढ़ाए
प्यास बुझाए
नदियों को विस्तार दे
झरनों से झर मधुर संगीत सुनाए।
जल आँखों के कोरों में ठहर
दर्द छुपाये
राज दबाए
दिल की तड़प को बाहर न आने दे
मन नही वरन आत्मा भींगाये।
जल आँखों से बाहर आकर
दर्द को रास्ता दे
मुस्कान को अर्थ दे
मन में पलती क्रोध की आग को
बिन किसी प्रयास के शांत कर जाए।
जल जीवन है,
जल है तो कल है,
जल ही हरियाली लाए
इतनी सी बात सबको समझ आये।

रूचिका
प्रधान शिक्षक
राजकीय प्राथमिक विद्यालय कुरमौली गुठनी सिवान बिहार

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