पद्यपंकज sandeshparak सत्य की विजय-कुमकुम कुमारी

सत्य की विजय-कुमकुम कुमारी



सत्य की विजय

न तीर से न तलवार से,
और जो न कटे कभी कटार से,
वो सत्य है, वो सत्य है, वो सत्य है।

जो अजर, अमर और अटल है,
होती जिसकी सदा विजय है,
वो सत्य है, वो सत्य है, वो सत्य है।

जो कल था, आज है और कल रहेगा,
जो न मरा है और न ही मरेगा,
वो सत्य है, वो सत्य है, वो सत्य है।

उज्ज्वल जिसकी काया है,
जिसमें न कोई दाग-धब्बा समाया है,
वो सत्य है, वो सत्य है, वो सत्य है।

क्षणभर के लिये ग्रहण इसे लग सकता है,
पर यह कभी मिट नहीं सकता है,
क्योंकि यह सत्य है, सत्य है और सत्य है।

होती जिसकी सदा ही जय है,
जहाँ न कोई डर है और न भय है,
वो सत्य है, वो सत्य है, वो सत्य है।

कुमकुम कुमारी
शिक्षिका
मुंगेर, बिहार

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