पोस्टमैन है सूरज चाचा,
डाक सुबह की लाता है ।
द्वारा – द्वार किरणों की पाती ,
ठीक समय पहुँचाता है ।
चुन – चुन करती चिड़िया रानी,
चुगती दाना, पीती पानी ।
गीत सुनाती प्यारे – प्यारे ,
जैसे हो आकाशवाणी ।
बसंत ऋतु छाई मतवाली,
बागों की है छटा निराली ।
खेतों में पीले सरसों लहराते,
बसंती हवा भी मानो फाग गाते ।
आई जब से गर्म दुपहरी ,
होने लगी छाँव की चोरी ।
किसको अपना रपट लिखाएं,
जब ये दिन गर्मी के आए ।
सावन में जब बादल छाए,
बारिश भी तन को भिगाए ।
मोर मगन हो नाचे – गाये,
किसान भी फूले न समाए ।
दिन सर्दी के जब आए,
आग सभी को अधिक सुहाए ।
ठंड से हो जाते सब परेशान,
बच्चें , बूढ़े और जवान ।
आशीष अम्बर
( विशिष्ट शिक्षक)
उत्कमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड – केवटी
जिला – दरभंगा
बिहार
0 Likes
