जीवन की ये कटु सच्चाई है कि असफलताओं के बिना प्रगति नहीं। चढ़ते-चढ़ते गिरकर फिर उठना, सँभलकर कदम आगे को बढाना। अनुशासन है जीवन की प्रगति, जो न माने…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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