नित मन की अमराईयों में, मन की बातें बोलती हैं, नीरस से सरस जीवन के, मिश्रित पीयूष रस घोलती हैं। समय बीत रहा है पल-पल, कह रहा है, हों सब…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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