दीपों की जगमग से, आशियाना खिल गया। उसको भी जैसे , मुस्कुराने का सवब मिल गया। त्यौहार आया,जगमगाते हैं दीप हर घर में, खुशियों के द्वार खुले,रौनक हर घर में।…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- मेरी बेटी – सुमन सौरभ
- बाल अभिलाषा – अमितेश कुमार (मलिकौरिया)
- मत कर अभी ब्याह मेरी मैया – नमन मंच – नीतू रानी
- सावित्री बाई फुले – सुमन सौरभ
- कलाधर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
- स्वास्थ्य – बैकुंठ बिहारी
- उमर हमर नौनिहाल यौ – मनु कुमारी
- बाल-विवाह – रत्ना प्रिया
- ठंड का प्रभाव – जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
- बगिया (बिहारी मोमोज) – मनु कुमारी