पार्वती के प्रिय पुत्र, एकदंत गणपति, आगवन घर-घर,लाए हैं आनंद साथ। मंदिरों के पट खुले, फूल माला खूब चढ़े, कुंज-कुंज शंखनाद,अंधेरे में दिखे नाथ। दाएं-बाएं रिद्धि-सिद्धि, मध्य बैठे गजानन, भक्तों…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- कुत्ते पाल रहे-नीतू रानी
- होली का रंग-कार्तिक कुमार
- बसंत का आगमन -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
- फाग में महका है हर अंग– राम किशोर पाठक
- तुम चलो तो सही-अमृता कुमारी
- देखो आयी होली – आयी होली- श्री रवि कुमार
- फाग-राम किशोर पाठक
- फाग क्या होती अम्मा बोल-राम किशोर पाठक
- बसंत की बहार- मुन्नी कुमारी
- गर्मी आई -नीतू रानी