कौन रुका है? प्रश्न है कौन रुका है? सूर्य, मंदाकिनी का चक्कर लगाते, अवनि, सूर्य का चक्कर लगाती, मयंक, पृथ्वी[...]
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सनातन धर्म – गिरीन्द्र मोहन झासनातन धर्म – गिरीन्द्र मोहन झा
धर्म जिसे कहते हैं। वह सनातन, शाश्वत, परित: है। धर्म वह है, जिससे हो, सबका सर्वांगीण विकास। सद्गुणों को धारण[...]
पिता – गिरीन्द्र मोहन झापिता – गिरीन्द्र मोहन झा
परमपिता परमेश्वर हैं, हम सब उनके संतान, उन्हीं की अनुकम्पा से, हम सब सदा क्रियमाण । सबसे पहले परमपिता परमात्मा[...]
भारत के प्राचीन ग्रंथ- गिरीन्द्र मोहन झाभारत के प्राचीन ग्रंथ- गिरीन्द्र मोहन झा
वेद-वेदान्त की है उक्ति यही, सदा बनो निर्भीक, कहो सोsहं , उपनिषद कहते हैं, ‘तत्त्वमसि’, तुम में ही है ‘ब्रह्म’,[...]
सागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झासागर और नदी -गिरीन्द्र मोहन झा
सागर ने नदी से कहा- सरिते! लोग कहते हैं, तुम नदी समान बनो, चलो, निरंतर चलो, विघ्नों को लाँघकर, अनवरत[...]
मृत्यु -गिरीन्द्र मोहन झामृत्यु -गिरीन्द्र मोहन झा
मृत्यु अटल है, शरीर की, मरण असम्भव, जमीर की, मृत्यु यदि मिले सुमृत्यु तो, देश हित, लोक हित में हो,[...]
किसने रोका है? – गिरीन्द्र मोहन झाकिसने रोका है? – गिरीन्द्र मोहन झा
किसने रोका है? अंधेरा घोर घना है, एक बत्ती जलाने से किसने रोका है? प्रदूषण बहुत ही है, एक पेड़[...]
लक्ष्य और दिशा- गिरीन्द्र मोहन झालक्ष्य और दिशा- गिरीन्द्र मोहन झा
लक्ष्य से अधिक है दिशा महत्त्वपूर्ण, सही दिशा में सतत करते रहो प्रयास, यदि दिशा सही हो, तो तू अगर[...]
