चरण छूलूँ भवानी माँ, पनाहों में मुझे पाओ। महादेवी जगतजननी, मुझे तो छोड़ मत जाओ। सदा तुम कष्ट ही हरती, तुम्हारे पास जो जाता। मिटेगा पाप उसका भी, दया…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- हरि वामन बन आए-राम किशोर पाठक
- मानवता जो जीवित मन में-राम किशोर पाठक
- चैत्र पावन मास है-राम किशोर पाठक
- परीक्षा-नैना कुमारी
- वामन अवतार- राम किशोर पाठक
- अहिल्याबाई होल्कर-राम किशोर पाठक
- कृपा करो प्रदान माँ-राम किशोर पाठक
- अंग-अंग प्रेम रंग-राम किशोर पाठक
- गीता का संदेश -गिरीन्द्र मोहन झा
- कैसे आए शांति -रामकिशोर पाठक