Tag: जैनेन्द्र प्रसाद “रवि”

Jainendra

मौसम का रंग- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मौसम का रंग- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 10:48 am

(रूप घनाक्षरी छंद) ठंडी-ठंडी हवा चली, सूखी मिट्टी हुई गीली, धूल भरी आंधी लाया, बादल ने बूंदों संग। हाँफ रहे[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

बैशाखी- जैनेन्द्र प्रसाद रविबैशाखी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 7:41 am

बरसों बाद फिर आई रुत ये बहार के, शुभ घड़ी आई, दिन बीते इंतजार के। फसलें तैयार हुईं देखो मन[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

प्यारे बच्चे- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्यारे बच्चे- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 1:54 pm

मनहरण घनाक्षरी छंद जगत से न्यारा रूप, ढ़ल जाते अनुरूप, बनकर चितचोर, सबको लुभाता है। पल में ही रूठ जाता,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

आलस्य से मुंह मोड़ो- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’आलस्य से मुंह मोड़ो- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 10:26 pm

पक्षियों ने छेड़े राग, प्यारे बच्चों जाओ जाग, भोर की सुहानी बेला, स्वच्छ आसमान है। अब तो विस्तर छोड़ो, आलस[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

विशाल बिरवान- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’विशाल बिरवान- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:33 am

कांधे पर चढ़कर, तन से लिपट कर, आसपास बच्चे बैठे, दादाजी पर ध्यान है। सिर्फ श्वेत बाल नहीं, झुर्रियों से[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

सुहानी सुबह- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’सुहानी सुबह- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:32 am

सुहानी सुबह बागों में बहार आई, खिल गई अमराई, हरे-हरे नए पत्ते, डालियों में हिलते। भोर लिया अंगड़ाई, सुहानी सुबह[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

बचपन की नादानी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’बचपन की नादानी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:22 am

कुछ शरारतें और नादानी याद जाती अपनी शैतानी, कभी सोचकर शर्म के मारे आ जाता आंखों में पानी। धमाचौकड़ी खूब[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

भारत का गौरव बिहार- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’भारत का गौरव बिहार- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 6:34 pm

जो गौतम की है तपोभूमि, जिसे महावीर का मिला प्यार, वह भारत का गौरव बिहार।। कोसी, फल्गु, बूढ़ी गंडक, इस[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

चारो फल पाइए- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’चारो फल पाइए- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 11:43 am

प्रभाती पुष्प 🌹🙏🌹🙏🌹🙏 मनहरण घनाक्षरी छंद भोलेनाथ अंतर्यामी, तीनों लोकों के है स्वामी, लंबोदर माता शिवा-शरण में आइए। भांग-भस्म, कंदमूल,[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें
Jainendra

रूप घनाक्षरी छंद- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’रूप घनाक्षरी छंद- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:30 pm

गुरू को समर्पित बागानों में फल-फूल, खेतों बीच कंद-मूल, सुमन को बसंत में, ‘रवि’ महकाता कौन! सूरज कहां से आता[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें