समाज की बलि नित्य बनती है औरत, क्या समाप्त हो गई हमें इसकी जरूरत? श्रद्धा से प्रेरणा पा मनु को[...]
Tag: जैनेन्द्र प्रसाद “रवि”
गुरु को नमन-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’गुरु को नमन-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
पूरब में देख लाली, झूमती है डाली डाली, धरती आबाद होती, सूरज किरण से। बसंत बहार देख, फूलों की कतार[...]
होली में-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’होली में-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद रंगों का त्योहार आया, खुशियां अपार लाया, आपस की बैर भूल, गले मिलें होली में। गली-गली मचा[...]
शिष्टाचार -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’शिष्टाचार -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद सामाजिक रिवाजों से, कट रहे युवा पीढ़ी, शिष्टाचार – व्यवहार, दिखते न वाणी में। सत्य का महल[...]
भोले भंडारी- जैनेन्द्र प्रसाद रविभोले भंडारी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि
मनहरण घनाक्षरी छंद गंगाजल जिन्हें भाता, भूत-प्रेत से है नाता, बेलपत्र पर रीझें, भोले जी भंडारी हैं। इन्द्र चढ़ें एरावत,[...]
प्रेम अनुराग -जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्रेम अनुराग -जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद बसंत बहार ले के, रंगों का त्योहार आया, जगदंबा माता संग, शिव खेलें फाग है। सिर पर[...]
उचित समय- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’उचित समय- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद पेड़ पौधे झुक जाते, जलधारा रुक जाते, जड़ पे असर होता, विनती विनय के। ईश में विश्वास[...]
गुण को नमन- जैनेन्द्र प्रसाद रविगुण को नमन- जैनेन्द्र प्रसाद रवि
फल फूल अन्न मिले, पौष्टिक भोजन मिले, परम नमनीय है, पसीना किसान के। देश की वो रीढ़ होते, धरती में[...]
स्वास्थ्य मंत्र- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’स्वास्थ्य मंत्र- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
दूर होंगे कष्ट सारे, निरोग रहोगे प्यारे, रोज दिन कुछ देर कसरत करना। राम-राम भज कर, आलस को तज कर,[...]
मौसम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मौसम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद रोज दिन पल-पल, मौसम बदल रहा, सेंकने को मन करे, बैठ खिली धूप को। जो रहेंगे सावधान,[...]
