दे विमल बुद्धि भावना, माँ शारदे है प्रार्थना , ऐसी शक्ति दे मां कर सकूं, हर संकटों का सामना। बालक बड़ा नादान हूं, धर्म-कर्म से अनजान हूं, जैसा भी हूं…
Tag: जैनेन्द्र प्रसाद “रवि”
देशप्रेम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद देश के सपूत करें, रोज दिन निगरानी, भारत की सीमा पर, सेना की निगाह है। दिन नहीं चैन मिले, रात नहीं नींद आती, देश की सुरक्षा हेतु,…
बेटियाँ -जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद पढ़ लिख कर बेटी, पैरों पर खड़ी होती, माता-पिता को भी होती, आसानी सगाई में। विचार बदलकर, घर से निकल गई, चूड़ी की जगह ले ली, कलम…
शांति का विकल्प-जैनेन्द्र प्रसाद रवि
मनहरण घनाक्षरी छंद जब कभी युद्ध होता, शांति को मानव खोता, द्वंद में विनाश छिपा, संतों का है कहना। प्रेम भाईचारा जैसा, लड़ाई विकल्प नहीं, शांति प्रिय लोग चाहें, मिलजुल…
सुहाना मौसम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद सरसों के फूलों पर, तितली है मँडराती, बहारों के आने पर, हँसता चमन है। झूमती खुशी में डाली, खेतों बीच हरियाली, कोयल की तान सुन, खिला तन…
मौसम का असर- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद दही-चूड़ा,तिल खा के, सूरज है अलशाया, कुहासे में दिखता है, धुंधला गगन है। पेड़ों की डालियों से शबनम टपक रही, बह रही मंद-मंद, शीतल पवन है। झरोखे…
श्रीराम राज्याभिषेक- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद सफल हों सारे काज, राम होंगे युवराज, राजदरबार संग, हर्षित समाज है। बड़े-बड़े भूप आए, भेंट उपहार लाए, अयोध्या में अब भाई, होगा रामराज है। पुलकित महतारी,…
हालात से मजबूर- जैनेन्द्र प्रसाद रवि
जीवन के कई रंग, लोग यहां लड़ें जंग, ठंड से ठिठुरे, नहीं चादर है पास में। कोई नहीं देखे अभी, दरवाजे बंद सभी, गली में भिखारी खड़ा- भोजन की आस…
बाल मन- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
बिस्किट मिठाई केक, नौनिहालों को भाते हैं, जहाँ हों खिलौने-टॉफी, आंखें उसी ओर हैं। कोई भी मौसम रहे, खुशियों की बाँह गहें, गली से चौबारे गूंजे, बच्चों की ही शोर…
नए साल में- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
सबकी चेहरे पर मुस्कान हो हर हाल में, सभी को मंजिल मिले, इस नए साल में। भूलकर शिकवे गिले, सभी से हम गले मिलें, दूरियाँ मिटे दिलों की, इस नए…