सभी देवियों से बढ़कर माँ ऊंचा है तेरा दर्जा, नहीं उतार पाऊंगा कभी जीवन भर मैं तेरा कर्जा। पहली बार[...]
Tag: जैनेन्द्र प्रसाद “रवि”
मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
बादल से जल मिले, भोजन से बल मिले, कभी कहीं तेल बिना, दीप नहीं जलता। काल पा के बड़ा होता,[...]
बाल घनाक्षरी -जैनेन्द्र प्रसाद रवि’बाल घनाक्षरी -जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
बच्चे करें भागदौड़, जैसे होता घोड़ा दौड़, कोई कीत-कीत कोई, खेलता कबड्डी है। किसी की कमीज ढ़ीली, नया जूता पैंट[...]
मनहरण घनाक्षरी -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
प्राण संग दुनिया से कर्म धर्म साथ जाते, केवल मानव तन जलता है आग़ में। दीप संग तेल जले परवाना[...]
नमन मंच – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’नमन मंच – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी “”””””””””””””””””””'” “डूबते को तिनके का” +++++++++++++ हजारों तारों के बीच, हमेशा चमकता है, जैसे आसमान बीच- एक ध्रुवतारा[...]
प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी वर्षा ऋतु आने पर, नदी नाले भरे जाते, आनंद से रहती है मछली तालाब में। लोगों की नज़र[...]
मनहरण घनाक्षरी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मनहरण घनाक्षरी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
रवि छिप जाता जब, चांद आसमान तब, सरोवर पड़ा जल झिलमिल करता। वर्षा ऋतु जाने पर, शरद के आने पर,[...]
चूहे की बारात-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’चूहे की बारात-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
घर से निकले चूहे राजा, ले के हाथी और बैंड बाजा। नई शेरवानी लंबा कुर्ता, पहन पतलून, टोपी जूता। घोड़े[...]
प्रभाती पुष्प- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्रभाती पुष्प- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी ****** लाखों मनुहार करें, कितना भी प्यार करें, पिंजरे में बंद पक्षी खुश नहीं दिखता । समय प्रभात[...]
सूर्य उपासना- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’सूर्य उपासना- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
युगों से इंतजार था, जिसे सारी दुनिया को, बिहार ने दिया छठ- पर्व की सौगात है। दिन रात निराहार- रह[...]
