Tag: जैनेन्द्र प्रसाद “रवि”

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रोज निवारण पर्व- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’रोज निवारण पर्व- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 3:39 pm

छंद :- मनहरण घनाक्षरी ****** चार दिवसीय पर्व, ख़ुशी ख़ुशी बीत गया, आज पावन पर्व का, हो गया पारण है।[...]

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माँ की ममता- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’माँ की ममता- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 8:39 pm

अपनी ममता की छाँव देकर तुमको गले लगाऊँ मैं। तुम हो मेरे कृष्ण-कन्हैया तुमको पाकर इठलाऊँ मैं।। रौशन तुमसे चाँद[...]

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दिवाली की सौगात – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’दिवाली की सौगात – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:53 pm

आओ मिलकर दीप जलाएं दिवाली की रात में, दिल का अंधेरा दूर है होता प्रेम की सौगात में। दिन रात[...]

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दीपावली- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’दीपावली- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:17 pm

मनहरण घनाक्षरी ****** जगमग दीप जले, चाँद सा भवन खिले, घर-घर लगी आज हैं बल्बों की लड़ियां। उमंग में जग[...]

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आँगन के फूल – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’आँगन के फूल – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 8:24 pm

जग के आंखों के हैं तारे ये आँगन के फूल हमारे, इनके आगे फीका लगता है नील गगन के चांद[...]

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दीपावली का संदेश – जैनेन्द्र प्रसाद रविदीपावली का संदेश – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 3:46 pm

दीपावली का संदेश ****** बच्चों अबकी दीवाली में फुलझड़ियों से मुंह मोड़ो। दुनिया की भलाई के खातिर तुम पटाखा मत[...]

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वर्षा की बूंदे – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’वर्षा की बूंदे – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:06 pm

मनहरण बाल घनाक्षरी “””””””””””””””””””””””” टप – टप गिरे ऐसे, लगता है मोती जैसे, नभ से वर्षा की बूंदे रिमझिम बरसे।[...]

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रावण दहन – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’रावण दहन – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 4:46 pm

अपने अंतर्मन का, रावण दहन करें, लोभ-मोह, दर्प-मान बड़ा ही दानव है। दूसरों से बैर भाव, मानवता का अभाव, क्षुद्र[...]

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भजन – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’भजन – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 8:25 pm

तोहर माथे में मुकुट गले हार सोहे ला, माई दसों हाथ तोहर हथियार सोहे ला। कर में कंगन सोहे भाल[...]

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प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 1:47 pm

मनहरण घनाक्षरी छंद हर साल नवरात्रि, माता की चरण आवे, पूजा बिना सुना लगे महल अटरिया। धन पद सुत दारा,[...]

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