रुप घनाक्षरी छंद में सीमाओं की रक्षा हेतु, कुर्बानी भी देनी होगी, कभी नहीं अधिकार, माँगा जाता हाथ जोड़। बार-बार[...]
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मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
सिर घुँघराले लट, तन पीतांबर पट, बहुत है नटखट, साँवरा साँवरिया। मंत्र मुक्त होता कवि, जाता बलिहारी रवि, मन को[...]
कभी घबराना नहीं – जैनेन्द्र प्रसाद रविकभी घबराना नहीं – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
रूप घनाक्षरी छंद तूफानों में नाव डोले, कभी खाए हिचकोले, धारा बीच माँझी चले, थाम कर पतवार। अवसर आने पर,[...]
अदृश्य सत्ता- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’अदृश्य सत्ता- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
मनहरण घनाक्षरी छंद अखिल ब्रह्मांड बीच, कोई तो है सार्वभौम, जिसके इशारे बिना, पत्ता नहीं हिलता। धरती खनिज देती, सीप[...]
योगासन का महत्व – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’योगासन का महत्व – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
श्री कृष्ण से ज्ञान पा के, ऋषियों ने अपनाया, असाध्य रोगों का स्थाई, उपचार योग है। जिसने भी अपनाया, पाया[...]
बच्चों का अंदाज- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’बच्चों का अंदाज- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
आने वाले समय की,उसको न चिंता होती, हमेशा वो हर पल, रहता बिंदास है। आँखों में बसा के चित्र, सबको[...]
विश्व पितृ दिवस – जैनेन्द्र प्रसाद रविविश्व पितृ दिवस – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
दुनिया के रिश्ते नाते, जन्म से ही बन जाते, पिता की जगह कोई, कभी न ले सकता। देर शाम आते[...]
मनहरन घनाक्षरी छंद – जैनेन्द्र प्रसाद रविमनहरन घनाक्षरी छंद – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
और कोई काम नहीं, मिलता आराम नहीं, थक हार कर थोड़ा, सूर्य अलसाया है। चलता हूँ जिस पथ, देखता हूँ[...]
दुनिया हैरान है – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’दुनिया हैरान है – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
जीव-जंतु परेशान, बढ़ रहा तापमान, अब भी तो चेतो भाई, कहाँ तेरा ध्यान है? धरती सिमट रही, आबादी से पट[...]
गर्मी से बचकर – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’गर्मी से बचकर – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
इस बार मौसम का अलग नजारा दिखे, दोपहर साँय-साँय, हवा चले कसकर। धूप की लपट बीच जलता है अंग-अंग, तपन[...]
