Tag: जैनेन्द्र प्रसाद “रवि”

Jainendra Prasad Ravi

बाली रे उमरिया – जैनेन्द्र प्रसाद रविबाली रे उमरिया – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 6:28 pm

प्रभाती पुष्प मनहरण घनाक्षरी छंद बाली रे उमरिया 🌹🌹🙏🙏🌹🌹 एक दिन राधा रानी भरने को गई पानी, भूल बस चली[...]

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Jainendra Prasad Ravi

चुनाव का असर – जैनेन्द्र प्रसाद रविचुनाव का असर – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 7:16 pm

मेरे दिलवाले सैयां पड़ती हूं तेरी पैंया, ला दो चांदी की पायल, पहनूंगी पांव में। दिला दो रेशम साड़ी, चार[...]

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सांवला सांवरिया – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’सांवला सांवरिया – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 7:10 pm

होली दिन राधा रानी भरने को गई पानी, सहेली के संग ले के, सिर पे गगरिया। मोहन हो मतवाला अबीर[...]

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होली का संदेश – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’होली का संदेश – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:48 pm

होली का संदेश प्रेम भाईचारा ले के होली का त्यौहार आता, गिले-शिकवे को भूल, खुशियां मनाइए। विरोधी के घर जाएं[...]

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Jainendra Prasad Ravi

गोकुल की होली – जैनेन्द्र प्रसाद रविगोकुल की होली – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 6:18 pm

प्रभाती पुष्प अबीर गुलाल संग रंगो की बौछार होती, कैसी होती लठ्ठमार, गोकुल की होली है। गोकुल की ग्वालों पर[...]

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Jainendra

होली का रंग – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’होली का रंग – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 8:49 pm

होली का रंग मनहरण घनाक्षरी छंद फाल्गुन महीना आया तन-मन हर्ष छाया, वृंदावन में होली का,दौर चहुंओर है। हिरनी सी[...]

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Jainendra Prasad Ravi

नारी तू नारायणी है – जैनेन्द्र प्रसाद रविनारी तू नारायणी है – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 8:37 pm

समाज की बलि नित्य बनती है औरत! क्या समाप्त हो गई इसकी जरूरत? श्रद्धा से प्रेरणा पा “मनु’ को आई[...]

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फाल्गुन के भाव – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’फाल्गुन के भाव – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 8:49 pm

कृपाण घनाक्षरी छंद विद्या:-फाल्गुन के भाव जंगल में नाचे मोर कोयल मचाती शोर, हलचल चहुंओर, आ गया फाल्गुन मास। हाथों[...]

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Jainendra Prasad Ravi

बगिया के फूल – जैनेन्द्र प्रसाद रविबगिया के फूल – जैनेन्द्र प्रसाद रवि

0 Comments 8:46 pm

विद्या:-रूप घनाक्षरी छंद बच्चें लगें फूल ऐसे गेंदा व गुलाब जैसे, खिले खिले चेहरे पे, दिखते जब मुस्कान। परियों की[...]

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कन्हैया की बाँसुरी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’कन्हैया की बाँसुरी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:16 am

कन्हैया की बाँसुरी मनहरण घनाक्षरी छंद “”””””””””””””””””””””” नैन कजरारे काले सिर लट घुंघराले, सबकी लुभाता मन, सूरत ये सांवरी। मोहक[...]

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