सुहागिन महिलाएं अपने पति के लिए, दीर्घायु जीवन हेतु, रखतीं हैं उपवास। मन-कर्म वचन से करती हैं उपासना, माँगती दुआएँ[...]
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गणेश चतुर्थी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’गणेश चतुर्थी – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
बिगड़ी बनाने हेतु सभी तेरे द्वार आते, श्रद्धा पूर्वक भक्तों के, वंदना में झुके माथ। नारियल फल-फूल मोदक चंदन लिए,[...]
अभिलाषा – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’अभिलाषा – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
महीनों के बाद मिला ये फल मेहनत का, हरा-भरा खेत देख, हँसता किसान है। बाँध और क्यारियों में लबालब पानी[...]
देश के कर्णधार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’देश के कर्णधार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
लेखक, शिक्षक, सेना, कर्मचारी राजनेता, चिकित्सक,वैज्ञानिक सभी कर्णधार हैं। राष्ट्र निर्माण खातिर जो भी करें योगदान, काश्तकार मजदूर, बड़े शिल्पकार[...]
कलयुगी लाल – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’कलयुगी लाल – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
बुढ़ापे की सहारा हेतु बहुत ही जतन से, संतान को बड़ा करें, लोग यहाँ पोस-पाल। जब रोजगार मिले, जीवन में[...]
G -20 सम्मेलन – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’G -20 सम्मेलन – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
“बीस देश” समूह का सफल आयोजन से, दुनिया ने दम देखा आधुनिक भारत का। दुनिया के नेताओं ने- चखा मेहमानबाजी,[...]
कृष्ण कन्हैया – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’कृष्ण कन्हैया – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
भक्तों की पुकार सुन धरा-धाम पर आए, देवकी के पुत्र बन मेरे कृष्ण कन्हैया। दधी भी खिलाती रोज, लोरियाँ सुनती[...]
कलयुगी लाल – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’कलयुगी लाल – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
बुढ़ापे की सहारा हेतु बहुत ही जतन से, संतान को बड़ा करें, लोग यहाँ पोस-पाल। जब रोजगार मिले, जीवन में[...]
जग के पालनहार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’जग के पालनहार – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’
जगत कल्याण हेतु- देवकी के घर आए, भाद्रपद अर्ध रात्रि, कृष्ण लिए अवतार। गोपियों के प्रेम वश- माखन चुराते रोज,[...]
शिक्षक हैं परेशान – जैनेन्द्र प्रसाद रविशिक्षक हैं परेशान – जैनेन्द्र प्रसाद रवि
ऊपर के अधिकारी, लेते नहीं जिम्मेवारी, आज यहां रोज होता, शिक्षकों का अपमान। सुधार के नाम पर, विद्यालय जाँच होता,[...]
