यूं ही ना कहते हम देवों के देव महादेव कर्म पथ पर हर पल अग्रसर, विराम का ना कोई चिंतन, भूतल, वन या हिम शिखर, कदम ना रुके कहीं पे…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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