आज मत पूछो,क्यों आई है बेटी—आज पूछो,कैसे बची है बेटी? गर्भ की देहरी परहर बार सवालों से जूझती,मौन की चादर ओढ़ेअपने होने का प्रमाण खोजती—वही है बेटी। उसकी किलकारीघर की…
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बालिका भ्रूणहत्या व्यथा-सुरेश कुमार गौरव
एक विचारणीय प्रश्न क्योंकि बालिका दिवस का मतलब समझना होगा। बालिका भ्रूणहत्या एक गंभीर समस्या है। इस पर रोक के प्रावधान भी हैं। पुरुष-स्त्री लिंगानुपात में असमानताएं देखे जा सकते…
सुन ओ मुनिया- मीरा सिंह “मीरा”
सुन ओ गुड़िया,सुन ओ मुनिया बदली बदली है यह दुनिया। आंखों में कुछ सपने गढ़ ले गुड़िया मुनिया तू भी पढ़ ले। जीवन होगा सुखद सलोना खुशियों से तू दामन…