बेटा का अधिकाररूप घनाक्षरी छंद में जनता है आती याद,हर पांँच वर्ष बाद,नेता की है आस टीकी, आपके इंसाफ पर। कहते हैं माई-बाप,मलिक हैं मेरे आप,कृपा कर एक वोट, दे…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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