कचरे को इधर-उधर ना फेको भाई, इसमें है सारे जग की भलाई। कूड़ा को कूड़ेदान में डालो, चारों ओर न गंदगी फैलाओ। दो कूड़ेदान देख हम सभी हैरान, दो रंगों…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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