Tag: मनहरण घनाक्षरी छंद

Jainendra

मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’

0 Comments 7:52 pm

सिर घुँघराले लट, तन पीतांबर पट, बहुत है नटखट, साँवरा साँवरिया। मंत्र मुक्त होता कवि, जाता बलिहारी रवि, मन को[...]

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S K punam

तुझे अपनाना है- एस.के.पूनमतुझे अपनाना है- एस.के.पूनम

0 Comments 3:05 pm

गगन में मेघ छाए, ठंडी-ठंडी बूंदें लाए, अंबु से सरिता भरी,हरि को पिलाना है। चल पड़े आप साथ, थाम रखें[...]

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Jainendra Prasad Ravi

अदृश्य सत्ता- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’अदृश्य सत्ता- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 7:14 pm

मनहरण घनाक्षरी छंद अखिल ब्रह्मांड बीच, कोई तो है सार्वभौम, जिसके इशारे बिना, पत्ता नहीं हिलता। धरती खनिज देती, सीप[...]

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Jainendra

प्रेम उपहार-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’प्रेम उपहार-जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 7:02 pm

मनहरण घनाक्षरी छंद सबकी बनाए भाल चौबीस का नया साल, साथियों के लिए लाए, खुशियां अपार है। आप सभी छोटे[...]

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Jainendra

मौसम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’मौसम- जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

0 Comments 9:29 pm

मनहरण घनाक्षरी छंद रोज दिन पल-पल, मौसम बदल रहा, सेंकने को मन करे, बैठ खिली धूप को। जो रहेंगे सावधान,[...]

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