मानवता मानवता हमें सिखाती है, जन कल्याण की बात करो। स्वार्थ का न तुम पकड़ो हाथ, सेवा सबकी निःस्वार्थ करो । फंसो न धर्म के चक्कर में तुम मानव-मानव सब…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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