दर्पण- राम किशोर पाठक

छंद – दोहा किरणें आती जो रही, लौटाती उस ओर। सतह परावर्तक सदा, कहलाती वह छोर।। सतह परावर्तन करे, दर्पण उसका नाम। वापस लौटाना सदा, होता जिसका काम।। सतही संरचना…

मर्यादा की रास में – राम किशोर पाठक 

दोहा छंद मर्यादा की रास में, पंचवटी में राम। शूर्पणखा आकर वहॉं, देख रही अविराम।।१।। सूरत मोहित कर गया, जगी काम की आग। सुंदर छवि लेकर गयी, करने वह अनुराग।।२।।…

विश्व विरासत दिवस – राम किशोर पाठक

मनहरण घनाक्षरी सभ्यता का इतिहास, मिले जानकारी खास, करे विश्व एहसास, धरोहर पाइए। अठारह अप्रैल को, संस्कृति संरक्षण को, भूतल उत्खनन को, विचार बनाइए। सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक स्थल रत, ज्ञान…

शिक्षक हूॅं बिहार का – राम किशोर पाठक

शिक्षक हूॅं बिहार का, ज्ञान के विस्तार का। बच्चों का भविष्य मैं, मार्ग हूॅं संसार का।। अलख जगाता रहता, सबमें सदाचार का। बच्चों में विचार का, कक्षा नवाचार का।। प्रतीक…

विश्वास और अभ्यास का छंद सोरठा

छंदों का अभ्यास, रोज कौन सीखा रहा। पूरा है विश्वास, लगन सिखाती है सही।। मात शारदे आस, जो ठुकरा सकती नहीं। मैं हूॅं उनका दास, अब सीखा सकती वही।। होगी…

राष्ट्रीय भेषज विज्ञान शिक्षा दिवस- राम किशोर पाठक

शिक्षा कृत संकल्प लें, चिकित्सा सा विकल्प लें, औषधि ज्ञान हित में, दिवस मनाइए। रोग मुक्ति बोध पले, शुचिता के भाव तले, जन मन स्वस्थ मिले, ज्ञान को बढ़ाइए। औषधी…