विधा:- रूप घनाक्षरी (अमूल्य इनका मोल) मिला के कदम ताल, कर दिये बुरा हाल, मचा गया हाहाकार,हुई जब कई गोल।[...]
Tag: रूप घनाक्षरी
रूप घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’रूप घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
यहाँ नाग पंचमी में, पूजे जाते नागदेव, शंकर पहनते हैं, बनाकर गले हार। स्वार्थ के हो वशीभूत, मदारी पकड़ते हैं,[...]
ज्ञान चक्षु अब खोल – एस.के.पूनमज्ञान चक्षु अब खोल – एस.के.पूनम
विधा:-रूप घनाक्षरी आनंद की तलाश में, भटकता यहाँ-वहाँ , पर द्वंद साथ लिए,घूम रहा गोल- गोल। चल कर थक गया,[...]
