जय-जय वीर कुंवर बलिदानी, भारत माँ के भक्त स्वाभिमानी। अस्सी वर्ष में भी थी ललकार, शौर्य-ध्वजा उठा कर दी यलगार।। शस्त्र उठाया, धर्मयुद्ध रचाया, फिरंगी अंग्रेज़ों को हरकाया। धरती गरजी,…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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