शिक्षक हूँ, बस मान चाहिए। थोड़ा- सा सम्मान चाहिए।। कोरा कागज हो, या हो पानी उसमें रंग मैं भरता हूँ। कलाकार हैं बड़े प्रवीण हम, छात्रों को यह बतलाता हूँ।।…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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