सरहद पे खड़े हैं लेकर जज्बा बलिदान का सरहद पे खड़े हैं लेकर जज्बा बलिदान का।देश की आन पे करते हैं खुद को यूँ कुर्बान देखिए।। न आँधी की परवाह…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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