जीवन पथ पता नहीं हम किसके बल से, जीवन जीते जाते हैं । डगर डगर पर रोड़ा पत्थर, फिर भी दौर लगाते हैं।। चंद दिनों का जीवन सबका फिर…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- परीक्षा-नैना कुमारी
- वामन अवतार- राम किशोर पाठक
- अहिल्याबाई होल्कर-राम किशोर पाठक
- कृपा करो प्रदान माँ-राम किशोर पाठक
- अंग-अंग प्रेम रंग-राम किशोर पाठक
- गीता का संदेश -गिरीन्द्र मोहन झा
- कैसे आए शांति -रामकिशोर पाठक
- बीत गया फागुन माह- रामकिशोर पाठक
- यही है सार जीवन का -एस. के. पूनम
- जीत का उत्सव-राम किशोर पाठक