धरती माँ का ये आँगन प्यारा, हरियाली से सजा है सारा। पेड़, पौधे, नदियाँ, पर्वत, इनसे ही जीवन है समृद्ध।[...]
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प्रकृति-अर्चना गुप्ताप्रकृति-अर्चना गुप्ता
प्रकृति प्रकृति की प्रवृत्ति आदिकाल से ही निश्छल सहज और सौम्य रही है करती रही है चिरकाल से सबकी तृष्णाओं[...]
प्रकृति-प्रियंका प्रियाप्रकृति-प्रियंका प्रिया
प्रकृति हो व्याकुल मन की; व्यथित क्षुधा तुम, अमृत तुल्य; नीर सुधा तुम।। हे प्रकृति रुपी; ममता मयी, तू सदा[...]
