धरती माँ धरती माँ है बड़ी महान, सबको मानती अपनी संतान I कष्ट हजारों सहती है, हमसे कुछ ना कहती हैं। लालन पालन करती है माँ, पेट हमारा भरती है…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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