पद्यपंकज padyapankaj प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

प्रभाती पुष्प – जैनेन्द्र प्रसाद रवि’


Jainendra Prasad Ravi

लेख सुनें तैयार

सनातन पर नाज
रूप घनाक्षरी छंद
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पाँच सौ वर्षों के बाद
वनवास काटकर,
राम रघुवर मेरे अवध में आए आज।

आँगन सजाते सभी
राम गीत गाते कभी,
देश की जनता घर दिवाली मनाती आज़।

संत भक्त गले मिलें,
घर-घर दीप जले,
दशरथ नंदन की माथे पे सजा है ताज।

देश खुशहाल होगा
कोई ना कंगाल होगा,
सारे देश वासी को है सनातन पर नाज़।

जैनेन्द्र प्रसाद रवि’

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