फिर कैसे मिले बच्चों में संस्कार
चाईनीज खाना चाईनीज प्यार
फिर कैसे मिले बच्चों में संस्कार
शिक्षा जब बनी व्यापार
जिसका न कोई परिवारिक सरोकार
फिर कैसे मिले बच्चों में संस्कार
कैसे पाएँ बच्चों में संस्कार का आधार
जब परिवार में हुए दादा दादी बेकार
फिर कौन सिखाए इनको संस्कार
जब चाहरदिवारी में सिमटा घर बार
जब धन दौलत ही बना सुख शांति का आधार
फिर कैसा प्यार और कौन सा संस्कार
पापा मम्मी डैडी मॉम बने
पापा मम्मी धन वैभव मोबाइल में उलझे
रहते नहीं कभी सुलझे सुलझे
दिन रात देखते परिवार में टकरार
फिर कौन बताएं क्या है संस्कार
फिर कैसे मिले बच्चों में संस्कार
1 Likes
shailendra kumar

